जिन्दगी के हर मोड़ पर एक हमसफ़र कि तलाश थी,
एक साथी,कोई अपना,
एक प्यारा सा बन्धन
एक खूबसूरत एहसास.
अजनबी था कोई, दस्तक दे रहा था
मैं नही जानती थी कि वो कैसा है
पर दिल ने कहॉ कि वो अपना है
और वो सच मैं कोई फरिश्ता ही है
वो अजनबी से अपना बन कर सांसो मैं बस गया
खुशनसीब हूँ मैं उनका साथ प कर........
Tuesday, April 3, 2007
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment